Wednesday, 26 September 2018


The Opal is a gemstone for the Venus planet. The Venus remains under the influence of an Opal gemstone. The Opal is worn in order to make Venus strong in our Horoscope. When a person wears an Opal, he progresses physically, he gets the benefit in the financial problems, his monetary gain is increased and he acquires the means of happiness. The Opal is useful for the success of love relation. The happiness in the married life is increased by this gemstone. The sexual power is restrained and the attraction in the personality of a person is enhanced.

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Tuesday, 25 September 2018

मूँगा पैंडेंट -
कुंडली में कमजोर है मंगल या चल रही है मंगल की दशा उत्साह की है कमी या मन में हमेशा बना रहता है डर तो धारण करें मूंगा पैंडेंट -
ज्योतिष की रत्न शाखा में मूंगे को मंगल के रत्न के रूप में निश्चित किया गया है और मूंगे में मंगल के सभी गुण विद्यमान होते हैं..... यदि कुंडली में मंगल कमजोर या पीड़ित हो तो ऐसे में मूंगा धारण करने की सलाह दी जाती है... मूंगा धारण करने से व्यक्ति में उत्साह पराक्रम और आत्मबल की वृद्धि होती है और मन में निर्भयता आती है, मूंगा धारण करने से व्यक्ति की कार्य क्षमता बढ़ने लगती है और आत्मिक बल भी... जिन लोगों में उत्साह की कमी हो या मन में हमेशा डर की स्थिति बनी रहती हो ऐसे लोगों को मूंगा पहनने से बहुत लाभ मिलता है और उनमे निडरता आती है आत्मबल मजबूत होता है... पर ये बात बहुत महत्वपूर्ण है के मूंगा रत्न सभी व्यक्तियों के लिए सूटेबल नहीं होता इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मंगल शुभ फलकारक ग्रह हो केवल उन्हें ही मूंगा पहनना चाहिए
विशेष रूप से मेष कर्क सिंह वृश्चिक धनु और मीन लग्न के व्यक्तियों के लिए मूंगा सूटेबल और शुभ रत्न हैं इन लग्नो के व्यक्ति मूंगा धारण कर सकते हैं 
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Monday, 24 September 2018

प्रेम-विवाह (लव मैरिज) और ग्रह योग

Moti benefits

मोती -
ज्योतिष की रत्न शाखा में चन्द्रमाँ के लिए "मोती" को निश्चित किया गया है जिसे हम पर्ल नाम से भी जानते हैं मोती एक प्रकार से चन्द्रमाँ का ही प्रतिरूप होता है इसमें चन्द्रमाँ के गुण विद्यमान होते हैं सामान्यतः कुंडली में चन्द्रमाँ कमजोर या पीड़ित होने पर ज्योतिषी मोती धारण करने की सलाह देते हैं......मोती धारण करने से व्यक्ति में सौम्यता व शीतलता का उदय होता है, मन एकाग्र होता है ओवर थिंकिंग, नेगेटिव थिंकिंग, मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं में मोती धारण करने से लाभ होता है इसके अलावा लंग्स से जुडी समस्या, अस्थमा, माइग्रेन, साइनस की समस्या, शीत रोग तथा मानसिक रोगों में भी मोती धारण करने से लाभ होता है तथा मानसिक अस्थिरता से व्यक्ति एकाग्रता की और बढ़ने लगता है स्थूल रूप में कहा जाये तो मोती धारण करने से पीड़ित या कमजोर चन्द्रमाँ  के सभी दुष्प्रभावों में लाभ व सकारात्मक परिवर्तन होता है.............लग्न अनुसार मोती धारण -  क्या आपको धारण करना चाहिए चंद्र रत्न मोती या नहीं
समान्यतः मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न के जातकों के लिए मोती धारण शुभ है। इसके अलावा वृष, मिथुन, कन्या, तुला और मकर लग्न के लिए मध्यम है अतः इन लग्नो में भी योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद मोती धारण किया जासकता है। परंतु सिंह, धनु और कुम्भ लग्न की कुंडली होने पर मोती कभी नहीं धारण करना चाहिए अन्यथा यह हानिकारक हो सकता है और इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं।   For more information click on this link-https://astroindusoot.com/astroproductsdetail/123

Monday, 3 September 2018

कुंडली में भाग्य स्थान

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कुंडली में नवम भाव (भाग्य स्थान) का विशेष महत्व - आपके भाग्य को नियंत्रित करता है कुंडली का नवम भाव
जीवन में सफलता असफलता की स्थिति तो सामान्यतः सभी के सामने आती है परंतु बहुत बार व्यक्ति का भाग्य का उदय होने में बड़ी बाधाएं और विलम्ब सामने आते हैं, जहाँ कुछ लोग अपने प्रयासों से जल्दी ही सफल हो जाते हैं वहीँ कुछ लोगो के भाग्योदय में बहुतसी बाधायें आती हैं और प्रत्येक कार्य के लिए अधिक संघर्ष का सामना करना पड़ता है, वैसे तो हमारी जन्मकुंडली में सभी ग्रह और अन्य घटक मिलकर ही हमारे पूरे भाग्य को निश्चित करते हैं परंतु कुंडली में नवम भाव (भाग्य स्थान) और इसके स्वामी ग्रह (भाग्येश) की बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है, नवम भाव को जहाँ धर्म भक्ति और आस्था का कारक माना गया है वही व्यक्ति के भाग्य का प्रतिनिधित्व भी नवम भाव ही करता है, कुंडली में नवम भाव भाग्य स्थान होने के कारण ही सबसे विशेष स्थान रखता है तथा भाग्य स्थान भाग्येश की स्थिति जीवन के प्रत्येक कार्य की सफलता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, कुंडली में भाग्य स्थान और भाग्येश अच्छी और बलवान स्थिति में होने पर व्यक्ति का भाग्योदय जल्दी सरलता से होजाता है तो वहीँ भाग्य स्थान भाग्येश कमजोर और पीड़ित होने पर जीवन में संघर्ष की अधिकता होती है आसानी से भाग्योदय नहीं होता तथा प्रत्येक कार्य की पूर्ति में बाधायें आती हैं। 
1. यदि भाग्येश भाग्य स्थान में ही स्थित हो या भाग्येश की भाग्य स्थान पर दृष्टि हो तो जीवन में अच्छी सफलता देता है और जल्दी ही व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।
2. कुंडली में भाग्येश यदि स्व उच्च राशि में होकर शुभ स्थान में हो तो अच्छी सफलता देता है तथा समय पर व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है।
3. भाग्येश का केंद्र त्रिकोण (1,4,7,10,5,9 भाव) में होना व्यक्ति को अच्छा भाग्य देता है तथा जीवन में किये गए प्रयास सफल रहते हैं।
4. भाग्य स्थान में शुभ ग्रह होना भी भाग्य वृद्धि करता है।
5. यदि भाग्येश नीच राशि में हो तो व्यक्ति के भयोदय में विलम्ब और संघर्ष होता है।
6. यदि भाग्येश पाप भाव (6,8,12) में हो तो जीवन में संघर्ष की अधिकता होती है तथा भाग्योदय में विलम्ब होता है।
7. यदि भाग्य स्थान में कोई पाप योग (ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग, अंगारक योग आदि) बन रहा हो तो ऐसे में व्यक्ति के भाग्य में बहुत अड़चने आती हैं। और आसानी से भाग्योदय नहीं हो पाता।
8. भाग्य स्थान में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो वः भी भाग्योदय में विलम्ब और संघर्ष कराता है।